संवर्ताग्नि तटित्प्रदीप्त कनक प्रस्पर्धि तेजोमयं
गंभीर ध्वनि सामवेदजनकं ताम्राधरं सुन्दरम्।
अर्धेन्दु द्युतिलोल पिङ्गळ जटाभार प्रबद्धोरगं
वन्दे सिद्ध सुरासुरेन्द्र नमितं पूर्वं मुखं शूलिनः।। 53
तत्पुरुषाय नमः। ओं नमो भगवते रुद्राय। पूर्वमुखाय नमः।
कालाभ्र भ्रमरांजनद्युति निभं व्यावृत्त पिङ्गेक्षणं
कर्णोद्भासित भोगि मस्तक मणि प्रोद्गीर्ण दंष्ट्राङ्कुरम्।
सर्प प्रोत कपाल शुक्ति शकल व्याकीर्ण सच्छेखरं
वन्दे दक्षिण मीश्वरस्य कुटिल भ्रूभङ्ग रौद्रं मुखम्।। 54
अघोराय नमः। ओं नमो भगवते रुद्राय। दक्षिणमुखाय नमः।
प्रालेयाचल मिन्दु कुन्दधवळं गोक्षीर फेनप्रभं
भस्मा भ्यक्त मनङ्ग देह दहन ज्वालावळी लोचनम्।
ब्रह्मेन्द्रादि मरुद्गणै स्स्तुतिपदै रभ्यर्चितं योगिभिः
वन्देहं सकलं कळङ्करहितं स्थाणो र्मुखं पश्चिमम्।।55
सद्योजाताय नमः। ओं नमो भगवते रुद्राय।पश्चिममुखाय नमः।
गौरं कुङ्कुमपङ्किलं सुतिलकं व्यापाण्डु गण्डस्थलं
भ्रूविक्षेप कटाक्ष वीक्षण लसत्संसक्त कर्णोत्पलम्।
स्निग्धं बिंब फलाधर प्रहसितं नीलालका लङ्कृतं
वन्दे पूर्ण शशाङ्क मण्डल निभं वक्त्रं हरस्योत्तरम्।।56
वामदेवाय नमः। ओं नमो भगवते रुद्राय। उत्तरमुखाय नमः।
व्यक्ताव्यक्त गुणेतरं सुविमलं षट्त्रिंश तत्त्वात्मकं
तस्मादुत्तम तत्त्व मक्षर मिति ध्येयं सदा योगिभिः।
ओङ्कारादि समस्त मन्त्रजनकं सूक्ष्मादि सूक्ष्मं परं
शान्तं पञ्चम मीश्वरस्य वदनं खव्यापि तेजोमयम्।।57
ईशानाय नमः। ओं नमो भगवते रुद्राय। ऊर्ध्वमुखाय नमः।